“US SEC द्वारा गौतम अडानी और सागर अडानी को समन भेजने की कोशिश से अडानी ग्रुप के शेयरों में 15% तक की गिरावट, कुल मार्केट कैप में 1.5 लाख करोड़ रुपये का सफाया। सभी 10 लिस्टेड कंपनियों प्रभावित, बाजार में हलचल और निवेशकों के लिए रिस्क एनालिसिस।”
US SEC ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को $265 मिलियन ब्राइबरी स्कीम से जुड़े फ्रॉड के आरोप में समन सर्व करने के लिए अमेरिकी कोर्ट से अनुमति मांगी है। यह मामला Adani Green Energy से जुड़ा है, जहां भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देकर बिजली खरीद कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने का आरोप है। इस खबर से भारतीय स्टॉक मार्केट में हड़कंप मच गया, और अडानी ग्रुप की सभी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर, ग्रुप की मार्केट वैल्यू में एक ही दिन में 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो पिछले कुछ वर्षों में ग्रुप की सबसे बड़ी सिंगल-डे लॉस है।
इस गिरावट का मुख्य कारण US SEC का एक्शन है, जो Adani Group के एक्जीक्यूटिव्स पर US सिक्योरिटीज लॉ उल्लंघन का आरोप लगा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Adani Green Energy ने निवेशकों से गलत और भ्रामक स्टेटमेंट्स दिए थे, जिससे कंपनी की फंडिंग प्रभावित हुई। यह केस नवंबर 2024 में दाखिल हुआ था, लेकिन हालिया कोर्ट फाइलिंग ने बाजार को फिर से हिला दिया। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है, लेकिन निवेशकों का विश्वास डगमगा गया है। FIIs ने लगातार 13 सेशंस में नेट सेलिंग की, जिससे कुल सेलऑफ 2,549 करोड़ रुपये का हुआ।
अडानी ग्रुप की 10 प्रमुख लिस्टेड कंपनियां इस क्रैश से प्रभावित हुईं, जिनमें से कई में 10% से ज्यादा की गिरावट आई। नीचे दी गई टेबल में प्रत्येक कंपनी के शेयर प्राइस, प्रतिशत गिरावट और अनुमानित नुकसान का विवरण है:
(नोट: ये आंकड़े बाजार क्लोज के आधार पर हैं; कुल नुकसान 1.5 लाख करोड़ तक पहुंचा।)
| कंपनी का नाम | क्लोजिंग प्राइस (रुपये में) | प्रतिशत गिरावट (%) | अनुमानित नुकसान (लाख करोड़ में) |
|---|---|---|---|
| Adani Enterprises | 1,891.60 | 9.38 | 0.45 |
| Adani Ports | 1,303.35 | 7.81 | 0.35 |
| Adani Power | 128.35 | 8.84 | 0.20 |
| Adani Total Gas | 507 | 7.55 | 0.15 |
| Adani Energy Solutions | 827.20 | 10.57 | 0.12 |
| Adani Green Energy | 1,450 | 12.50 | 0.18 |
| Adani Wilmar | 320 | 9.20 | 0.08 |
| ACC | 2,100 | 8.10 | 0.10 |
| Ambuja Cements | 550 | 7.90 | 0.09 |
| NDTV | 180 | 15.00 | 0.03 |
इस गिरावट से Sensex 750 पॉइंट्स नीचे बंद हुआ, जबकि Nifty 50 25,050 के नीचे आ गया। Adani Ports Sensex के टॉप लूजर्स में शामिल रहा, जिससे ओवरऑल मार्केट सेंटिमेंट प्रभावित हुआ। बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर्स में भी प्रेशर देखा गया, क्योंकि Adani Group की कंपनियां इन सेक्टर्स में प्रमुख प्लेयर हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर US SEC की जांच आगे बढ़ी, तो Adani Group की फंडिंग कॉस्ट बढ़ सकती है, और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का निकलना जारी रह सकता है।
कुंजी पॉइंट्स:
ब्राइबरी स्कीम का विवरण : US SEC के अनुसार, Adani Group ने भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देकर सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल किए, जो $265 मिलियन के आसपास थे। यह स्कीम Adani Green Energy की फंड रेजिंग से जुड़ी थी, जहां निवेशकों को गलत जानकारी दी गई।
भारतीय बाजार पर असर : Rupee डॉलर के मुकाबले 91.95 के रिकॉर्ड लो पर पहुंचा, जो Adani क्रैश से जुड़ा हुआ है। FII सेलिंग ने बाजार को और नीचे धकेला, जबकि DIIs ने कुछ सपोर्ट दिया लेकिन पर्याप्त नहीं।
Adani Group की रिस्पॉन्स : कंपनी ने कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं और वे कानूनी रूप से लड़ेंगे। हाल ही में ग्रुप ने Kutch में 1.5 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की थी, जो ग्रीन एनर्जी और लॉजिस्टिक्स पर फोकस है, लेकिन यह क्रैश उस प्लान को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों के लिए रिस्क : शॉर्ट-टर्म में volatility जारी रह सकती है। लॉन्ग-टर्म निवेशक डायवर्सिफिकेशन पर फोकस करें, जबकि ट्रेडर्स स्ट्रिक्ट स्टॉप-लॉस यूज करें। अगर जांच क्लियर हुई, तो रिकवरी संभव है, लेकिन US लॉ के तहत पेनल्टीज हाई रिस्क हैं।
ग्लोबल कनेक्शन : Davos 2026 में चर्चा हुई कि ग्लोबल ट्रेड टैरिफ्स और AI ट्रांसफॉर्मेशन से भारतीय कंपनियां प्रभावित होंगी। Adani का केस इससे जुड़ा है, क्योंकि ग्रुप की इंटरनेशनल फंडिंग पर सवाल उठे हैं।
सेक्टर-वाइज इंपैक्ट : एनर्जी सेक्टर में Adani Green सबसे ज्यादा हिट, जबकि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स में Adani Ports का क्रैश सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। सीमेंट सेक्टर में ACC और Ambuja Cements की गिरावट इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर दबाव डालेगी।
एक्सपर्ट एनालिसिस : बैंकर्स का कहना है कि AI और ग्लोबल अनसर्टेनिटी से बाजार volatile रहेगा। Rahul Gandhi ने सरकार पर ‘डेड इकोनॉमी’ का आरोप लगाया, जो जॉब लॉस और टैरिफ प्रेशर से जुड़ा है।
इस घटना से साबित होता है कि अंतरराष्ट्रीय जांचें भारतीय कॉरपोरेट्स के लिए बड़ा रिस्क हैं, खासकर जब फ्रॉड और ब्राइबरी के आरोप लगें। Adani Group की ग्रोथ पिछले कुछ वर्षों में तेज रही, लेकिन ऐसे क्रैश रेगुलेटरी स्क्रूटनी बढ़ा सकते हैं। निवेशकों को कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर नजर रखनी चाहिए, जहां डेट लेवल हाई है। अगर US कोर्ट ने समन अप्रूव किया, तो आगे की सुनवाई में नए खुलासे हो सकते हैं, जो ग्रुप की क्रेडिट रेटिंग को डाउनग्रेड कर सकते हैं।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।