“केंद्रीय बजट 2026-27 में कुल व्यय ₹53.47 लाख करोड़ का प्रावधान, जिसमें राजस्व व्यय ₹41.25 लाख करोड़ और पूंजीगत व्यय ₹12.22 लाख करोड़ शामिल; राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3% अनुमानित; रक्षा क्षेत्र के लिए कैपेक्स में 21% वृद्धि के साथ ₹5.9 लाख करोड़; एमएसएमई के लिए ₹10,000 करोड़ का ग्रोथ फंड; सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा; रेलवे में 7 पर्यावरण अनुकूल पैसेंजर कॉरिडोर और ईस्ट-वेस्ट फ्रेट कॉरिडोर; एविएशन सेक्टर में सीप्लेन मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन।”
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने नौवें बजट भाषण में 85 मिनट के दौरान कुल ₹53.47 लाख करोड़ के व्यय की रूपरेखा प्रस्तुत की, जो प्रति मिनट औसतन ₹62,909 करोड़ के बराबर है। इस बजट में सरकार ने सतत आर्थिक विकास, क्षमता निर्माण और सबका साथ, सबका विकास के तीन कर्तव्यों पर जोर दिया। कुल व्यय में राजस्व व्यय का हिस्सा ₹41.25 लाख करोड़ है, जबकि पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर ₹12.22 लाख करोड़ किया गया, जो पिछले वर्ष के ₹11.2 लाख करोड़ से अधिक है। राजकोषीय घाटा को जीडीपी के 4.3% पर नियंत्रित रखने का लक्ष्य रखा गया, साथ ही नेट टैक्स रसीदों का अनुमान ₹28.7 लाख करोड़ लगाया गया।
बजट में आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी विकास पर फोकस है, जिसमें एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के उपाय शामिल हैं। सरकार ने 350 से अधिक आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने का उल्लेख किया, जैसे जीएसटी सरलीकरण, लेबर कोड्स की अधिसूचना और क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स का युक्तिकरण। अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को 7% के आसपास बनाए रखने के लिए सार्वजनिक निवेश पर जोर दिया गया, साथ ही निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया।
प्रमुख क्षेत्रीय आवंटन
बजट में विभिन्न मंत्रालयों और सेक्टरों के लिए विशिष्ट आवंटन किए गए हैं, जो विकास की दिशा दर्शाते हैं। नीचे दी गई तालिका प्रमुख आवंटनों का सारांश प्रस्तुत करती है:
| सेक्टर/मंत्रालय | आवंटन (₹ लाख करोड़ में) | प्रतिशत वृद्धि (पिछले वर्ष से) | प्रमुख फोकस |
|---|---|---|---|
| रक्षा | 5.9 (कैपेक्स) | 21% | आधुनिकीकरण और स्वदेशीकरण |
| गृह मंत्रालय | 2.55 | 9.44% | आंतरिक सुरक्षा और चीन फोकस |
| पूंजीगत व्यय (कुल) | 12.22 | 9% (लगभग) | इंफ्रास्ट्रक्चर विकास |
| एमएसएमई ग्रोथ फंड | 0.10 | नया | सप्लाई चेन और निर्यात बढ़ावा |
| इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम | 0.40 | बढ़ोतरी | सेमीकंडक्टर सपोर्ट |
| रेलवे | (सम्मिलित इंफ्रा में) | – | 7 ग्रीन पैसेंजर कॉरिडोर |
रक्षा क्षेत्र में कैपेक्स को 21% बढ़ाकर ₹5.9 लाख करोड़ किया गया, जिसमें आधुनिकीकरण के लिए 24% अतिरिक्त बजट शामिल है। यह आवंटन सीमा सुरक्षा, स्वदेशी हथियार निर्माण और रक्षा निर्यात को मजबूत करने के लिए है। गृह मंत्रालय को ₹2.55 लाख करोड़ दिए गए, जो आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और चीन से जुड़े मुद्दों पर फोकस करता है।
मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री फोकस
बजट में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 7 रणनीतिक और फ्रंटियर सेक्टरों में स्केलिंग अप पर जोर दिया गया। इनमें बायोफार्मा शक्ति, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, टेक्सटाइल्स के लिए इंटीग्रेटेड प्रोग्राम, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0, रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स और स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं। ISM 2.0 से सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स स्कीम का आवंटन ₹40,000 करोड़ तक बढ़ाया गया।
200 लिगेसी इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को पुनर्जीवित करने की स्कीम शुरू की गई, जिसमें हाई-टेक टूल रूम्स सीपीएसई में स्थापित किए जाएंगे। रेयर अर्थ कॉरिडोर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विकसित किए जाएंगे, जो रिसर्च, माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करेंगे। तीन डेडिकेटेड केमिकल पार्क क्लस्टर-बेस्ड प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर स्थापित किए जाएंगे, जो घरेलू उत्पादन बढ़ाएंगे। कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट के हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की स्कीम भी लॉन्च की गई।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसपोर्टेशन विकास
इंफ्रास्ट्रक्चर पर मजबूत थ्रस्ट के तहत रेलवे में 7 पर्यावरण अनुकूल पैसेंजर रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, साथ ही एक डेडिकेटेड ईस्ट-वेस्ट फ्रेट कॉरिडोर। यह कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और जॉब क्रिएशन को बढ़ावा देगा। एविएशन सेक्टर में सीप्लेन मैन्युफैक्चरिंग के इंडिजिनाइजेशन के लिए इंसेंटिव्स दिए गए, साथ ही कस्टम्स ड्यूटी एग्जेम्प्शन्स से लागत कम होगी। क्षेत्रीय और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए एविएशन को पर्यटन और लॉजिस्टिक्स से जोड़ा गया।
एमएसएमई और एंप्लॉयमेंट सपोर्ट
एमएसएमई को सप्लाई चेन, एंप्लॉयमेंट और एक्सपोर्ट्स के प्रमुख ड्राइवर के रूप में महत्व दिया गया। ₹10,000 करोड़ का डेडिकेटेड ग्रोथ फंड गेम-चेंजर साबित होगा, जो सेक्टर की क्षमता बढ़ाएगा। चैंपियन एसएमई क्रिएट करने की पहल से उत्पादकता और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। नए कर्मचारियों के लिए ईपीएफ सपोर्ट, एमएसएमई के लिए मुद्रा लोन, आदिवासी छात्रों के लिए एकलव्य रेजिडेंशियल स्कूल्स और उच्च शिक्षा के लिए राइज इनिशिएटिव शामिल हैं।
अन्य प्रमुख घोषणाएं
एआई और टेक्नोलॉजी : शिक्षा सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए नया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित किया जाएगा, जो गवर्नेंस और ट्रस्ट को मजबूत करेगा।
पर्यटन और कल्चर : 15 पुरातात्विक स्थलों को जीवंत सांस्कृतिक डेस्टिनेशन में विकसित किया जाएगा, साथ ही ग्लोबल बिग कैट समिट की मेजबानी।
कस्टम्स और एक्साइज : टैरिफ स्ट्रक्चर को सरल बनाया जाएगा, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने के लिए प्रस्ताव।
आर्थिक दृष्टिकोण : इकोनॉमिक सर्वे 2026 के अनुसार, FY26 में 7.4% और FY27 में 6.8-7.2% वृद्धि अनुमानित, जो रेगुलेटरी रिफॉर्म्स और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट से समर्थित होगी।
बजट में महत्वाकांक्षी और समावेशी विकास का संतुलन बनाया गया, जिसमें महत्वपूर्ण आयात निर्भरता कम करने, संरचनात्मक सुधारों और राजकोषीय सावधानी पर फोकस है। वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाया गया, जिसमें जोखिम प्रबंधन और बचत जुटाने पर जोर। कटिंग-एज टेक्नोलॉजीज जैसे एआई को बेहतर गवर्नेंस के लिए फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। हर परिवार, समुदाय और क्षेत्र को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया।
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