“ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत मील वाउचर पर टैक्स छूट की सीमा ₹50 से बढ़ाकर ₹200 प्रति मील प्रस्तावित की गई है। इससे सैलरीड कर्मचारियों को सालाना ₹1,05,600 तक टैक्स-फ्री बेनिफिट मिल सकता है, जो वर्तमान ₹26,400 से काफी अधिक है। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है, जिससे टेक, आईटी और अन्य सेक्टरों में काम करने वाले कर्मचारियों की टैक्स बचत बढ़ेगी।”
सैलरी वालों के लिए अच्छी खबर, हर मील वाउचर पर अब मिल सकती है ₹200 तक टैक्स छूट; सालाना ₹1 लाख से ज्यादा होगी बचत
भारत में सैलरीड कर्मचारियों के लिए इनकम टैक्स में एक महत्वपूर्ण राहत की संभावना बढ़ गई है। ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के अनुसार, एम्प्लॉयर द्वारा प्रदान किए जाने वाले मील वाउचर या फूड कूपन पर टैक्स छूट की सीमा को मौजूदा ₹50 प्रति मील से बढ़ाकर ₹200 प्रति मील करने का प्रस्ताव है। यह बदलाव नए इनकम टैक्स एक्ट के साथ 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो सकता है, जिससे कर्मचारियों की सालाना टैक्स बचत में भारी इजाफा होगा।
वर्तमान नियमों के तहत मील वाउचर (जैसे Pluxee, पहले Sodexo, या Zeta जैसे) पर ₹50 प्रति मील तक की छूट उपलब्ध है। यदि एम्प्लॉयर दो मील प्रदान करता है, तो यह ₹100 प्रतिदिन होता है, लेकिन टैक्स-फ्री केवल ₹50 प्रति मील तक सीमित रहता है। इससे सालाना अधिकतम छूट लगभग ₹26,400 (₹50 × 2 मील × 22 वर्किंग डेज × 12 महीने) तक रह जाती है। अब प्रस्तावित ₹200 प्रति मील की सीमा से यह लाभ चार गुना बढ़ जाएगा।
प्रस्तावित छूट का गणित
मान लीजिए एम्प्लॉयर दो मील प्रतिदिन प्रदान करता है (जो अधिकांश आईटी, कॉर्पोरेट और प्राइवेट सेक्टर में सामान्य है):
प्रति मील छूट: ₹200
प्रतिदिन छूट: ₹200 × 2 = ₹400
मासिक छूट (22 वर्किंग डेज मानकर): ₹400 × 22 = ₹8,800
सालाना छूट: ₹8,800 × 12 = ₹1,05,600
इसका मतलब है कि सालाना ₹1,05,600 तक का मील बेनिफिट पूरी तरह टैक्स-फ्री हो सकता है, बशर्ते वाउचर नॉन-ट्रांसफरेबल हों और केवल ईटिंग जॉइंट्स पर रिडीम किए जा सकें। यह राशि कर्मचारी की टैक्सेबल इनकम से घट जाएगी, जिससे टैक्स स्लैब के आधार पर बचत होगी।
उदाहरण के लिए:
30% टैक्स ब्रैकेट (प्लस सेस) में कर्मचारी को लगभग ₹30,000-32,000 तक की अतिरिक्त टैक्स बचत हो सकती है।
20% ब्रैकेट में यह ₹20,000 से अधिक की बचत देगा।
कौन लाभान्वित होगा?
यह सुविधा मुख्य रूप से उन सैलरीड कर्मचारियों को फायदा पहुंचाएगी जिनकी सैलरी स्ट्रक्चर में मील वाउचर या सब्सिडाइज्ड फूड शामिल है। आईटी, आईटीईएस, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंसल्टिंग और बड़े कॉर्पोरेट सेक्टर में यह बेनिफिट आम है। ऑफिस कैंटीन या प्रीपेड फूड कार्ड्स के जरिए यह लागू होता है।
ध्यान दें:
यह छूट मुख्य रूप से पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में स्पष्ट रूप से उपलब्ध है, जहां विभिन्न एक्जेम्प्शन्स और डिडक्शन्स मिलते हैं।
नए टैक्स रिजीम में भी कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार ब्लॉकिंग क्लॉज हटाए गए हैं, जिससे दोनों रिजीम में लाभ संभव हो सकता है, लेकिन अंतिम अधिसूचना पर निर्भर करेगा।
कर्मचारियों को अपने HR से संपर्क कर सैलरी स्ट्रक्चर में इस बेनिफिट को शामिल करने की मांग करनी चाहिए, क्योंकि यह ऑटोमैटिक नहीं जोड़ा जाता।
अन्य संबंधित बदलाव
ड्राफ्ट रूल्स में मील वाउचर के अलावा गिफ्ट वाउचर की सीमा ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 सालाना, चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस ₹100 से ₹3,000 प्रति माह प्रति बच्चा, और हॉस्टल अलाउंस ₹300 से ₹9,000 प्रति माह प्रति बच्चा करने का प्रस्ताव है। ये सभी बदलाव सैलरीड क्लास के लिए कुल टैक्स बोझ कम करने में सहायक होंगे।
यह प्रस्ताव पब्लिक कमेंट के लिए जारी किया गया है और फरवरी 2026 के अंत तक फीडबैक के बाद अंतिम रूप लेगा। यदि लागू हुआ तो यह मिडिल क्लास और युवा प्रोफेशनल्स के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से बड़ा राहत पैकेज साबित होगा।