ओल्ड टैक्स रिजीम का अंत? CBDT चेयरमैन का बड़ा दावा- 88% टैक्सपेयर्स नए रिजीम में शिफ्ट, STT पर क्या बोले?

“CBDT चेयरमैन रवि अग्रवाल ने दावा किया कि 88% व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स नए टैक्स रिजीम में शिफ्ट हो चुके हैं, जबकि ओल्ड रिजीम को खत्म करने का कोई सनसेट क्लॉज नहीं है। STT में बढ़ोतरी से डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग प्रभावित होगी, लेकिन MAT रिफॉर्म्स से ज्यादा कंपनियां नए रिजीम की ओर आएंगी, जिसमें 95-97% टैक्सपेयर्स के शिफ्ट होने की उम्मीद है।”

CBDT चेयरमैन रवि अग्रवाल ने हालिया बजट में डायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म्स पर चर्चा करते हुए कहा कि नए टैक्स रिजीम की अपनाने की दर तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स में से 88% ने नए रिजीम को चुन लिया है, जो सरलीकृत स्लैब्स और कम डिडक्शन्स के साथ आता है। यह शिफ्ट डेटा-ड्रिवन है, जहां प्रिजम्प्टिव स्कीम्स के तहत 97% टैक्सपेयर्स पहले से ही नए रिजीम में हैं। चेयरमैन ने जोर दिया कि ओल्ड रिजीम को चुपचाप खत्म करने की कोई योजना नहीं है, बल्कि यह टैक्सपेयर्स की पसंद पर निर्भर करेगा।

नए रिजीम में शिफ्ट होने से टैक्स कैलकुलेशन आसान होता है, जहां स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है, और सैलरी पर जीरो टैक्स की लिमिट 12 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इससे करीब 1 करोड़ टैक्सपेयर्स को फायदा होगा, खासकर मिडल क्लास वर्किंग प्रोफेशनल्स को। अग्रवाल ने बताया कि MAT रिफॉर्म्स से कंपनियां भी नए 22% टैक्स रेट की ओर आकर्षित होंगी, जहां एक्यूमुलेटेड MAT क्रेडिट को मार्च 31 तक सम्मानित किया जाएगा। इससे कॉर्पोरेट सेक्टर में ट्रस्ट-बेस्ड टैक्सेशन को बढ़ावा मिलेगा।

STT पर चेयरमैन ने कहा कि डेरिवेटिव्स पर बढ़ी हुई दरें स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को कंट्रोल करने के लिए हैं, जो मार्केट स्टेबिलिटी को मजबूत करेंगी। पहले STT रेट 0.01% था, जो अब 0.02% हो गया है, जबकि फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर यह 0.015% से बढ़कर 0.02% हो गया है। इससे ट्रेडर्स को ज्यादा सावधानी बरतनी होगी, लेकिन लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स पर कम असर पड़ेगा।

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नए बनाम ओल्ड टैक्स रिजीम की तुलना

पैरामीटरनया टैक्स रिजीमओल्ड टैक्स रिजीम
टैक्स स्लैब्स0-3 लाख: 0%, 3-7 लाख: 5%, 7-10 लाख: 10%, 10-12 लाख: 15%, 12-15 लाख: 20%, 15 लाख से ऊपर: 30%0-2.5 लाख: 0%, 2.5-5 लाख: 5%, 5-10 लाख: 20%, 10 लाख से ऊपर: 30%
डिडक्शन्सलिमिटेड (स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये)मल्टिपल (HRA, 80C, 80D आदि)
अपनाने की दर88% व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स12% बाकी
फायदेसरल कैलकुलेशन, कम पेपरवर्कज्यादा सेविंग्स ऑप्शंस, लेकिन कॉम्प्लेक्स
MAT इंपैक्टकंपनियों के लिए 22% रेट, क्रेडिट सम्मानितहाई MAT रेट्स, कम शिफ्ट

इस तालिका से साफ है कि नया रिजीम ज्यादा यूजर-फ्रेंडली है, जो यंग प्रोफेशनल्स और स्टार्टअप एम्प्लॉयीज़ के लिए आइडियल है। चेयरमैन ने कहा कि 95-97% टैक्सपेयर्स जल्द नए रिजीम में आएंगे, क्योंकि बजट में ऑप्टिमल एप्रोच अपनाया गया है।

STT बढ़ोतरी के प्रमुख प्रभाव

डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग: F&O पर STT दोगुना होने से शॉर्ट-टर्म ट्रेड्स महंगे होंगे, जो रिटेल इन्वेस्टर्स को सतर्क बनाएगा। अनुमान है कि इससे सालाना 20,000 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू आएगा।

मार्केट स्टेबिलिटी: स्पेकुलेशन कम होने से शेयर मार्केट में वोलेटिलिटी घटेगी, जो BSE और NSE जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए पॉजिटिव है।

इन्वेस्टर टिप्स: लॉन्ग-टर्म होल्डिंग्स पर फोकस करें, जैसे म्यूचुअल फंड्स या SIP, जहां STT का असर न्यूनतम है।

कॉर्पोरेट शिफ्ट: MAT रिफॉर्म्स से 50% से ज्यादा कंपनियां नए रिजीम में आएंगी, जो टैक्स रेट को 15% तक कम कर सकता है अगर क्वालिफाइंग क्राइटेरिया मैच करें।

अग्रवाल ने जोर दिया कि ये रिफॉर्म्स ट्रस्ट-बेस्ड टैक्सेशन की दिशा में हैं, जहां ई-फाइलिंग और इनसाइट पोर्टल से टैक्सपेयर्स को रीयल-टाइम असिस्टेंस मिलेगी। नए इनकम टैक्स एक्ट से कानून सरल होंगे, जो मौजूदा ‘बल्की’ स्ट्रक्चर को रिप्लेस करेगा। इससे टैक्स कंप्लायंस रेट 90% से ऊपर जा सकता है।

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MAT रिफॉर्म्स के फायदे

क्रेडिट सम्मान: मार्च 31 तक के एक्यूमुलेटेड क्रेडिट को नए रिजीम में कैरी फॉरवर्ड किया जाएगा, जो कंपनियों को 10,000 करोड़ से ज्यादा की राहत देगा।

रेट रिडक्शन: 22% कॉर्पोरेट टैक्स रेट से ग्लोबल कंपटीटिवनेस बढ़ेगी, खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में।

शिफ्ट इंसेंटिव: प्रिजम्प्टिव स्कीम्स में 97% अपनाने से स्मॉल बिजनेस को फायदा, जहां टर्नओवर पर फिक्स्ड टैक्सेशन लागू है।

टैक्सपेयर चॉइस: ओल्ड रिजीम को खत्म नहीं किया जाएगा, लेकिन नए की अपील बढ़ने से नैचुरल शिफ्ट होगा।

कंप्लायंस ईज: नई फॉर्म्स और रूल्स से फाइलिंग टाइम आधा हो जाएगा, जो डिजिटल इंडिया के साथ अलाइन है।

चेयरमैन ने कहा कि ये बदलाव टैक्स सिस्टम को फ्यूचर-प्रूफ बनाएंगे, जहां डेटा एनालिटिक्स से फ्रॉड डिटेक्शन तेज होगा। STT हाइक से रेवेन्यू बढ़ेगा, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में लगाया जाएगा।

टैक्सपेयर्स के लिए की टिप्स

अगर आपका इनकम 15 लाख से कम है, तो नए रिजीम में शिफ्ट करके 20,000 रुपये तक की सेविंग्स करें।

MAT क्रेडिट वाली कंपनियां नए रिजीम को प्राथमिकता दें, क्योंकि क्रेडिट एक्सपायरी से पहले यूज हो सकता है।

STT से बचने के लिए इक्विटी होल्डिंग्स को 1 साल से ऊपर रखें, जहां LTCG टैक्स 12.5% है।

प्रिजम्प्टिव स्कीम्स चुनें अगर बिजनेस टर्नओवर 2 करोड़ से कम है, जो ऑडिट से बचाएगा।

ई-फाइलिंग पोर्टल पर चेक करें अपना रिजीम स्टेटस, जहां AI-बेस्ड सजेशन्स उपलब्ध हैं।

ये रिफॉर्म्स इंडियन इकोनॉमी को बूस्ट देंगे, जहां टैक्स कलेक्शन 22 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है।

Disclaimer: This article is based on news reports and tips from various sources.

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