**” हाल के महीनों में भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में तेजी आई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर 2026 की शुरुआत में EV रजिस्ट्रेशन 3% गिरे हैं। भारत में पैसेंजर EV की बिक्री जनवरी 2026 में 51-54% YoY बढ़ी, लेकिन GST कटौती से ICE वाहनों की कीमतें कम होने, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, सर्विस चैलेंज और हाइब्रिड की बढ़ती अपील से EV क्रेज में कमी आई है, जिससे कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। “**
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा था, लेकिन अब इसमें मंदी के संकेत मिल रहे हैं। वैश्विक स्तर पर EV सेक्टर में 2026 की शुरुआत कमजोर रही, जहां जनवरी में रजिस्ट्रेशन 3% घटकर लगभग 12 लाख यूनिट रह गए। चीन और उत्तरी अमेरिका में मंदी का सबसे ज्यादा असर पड़ा, जहां चीन में 20% और अमेरिका में 33% की गिरावट दर्ज हुई। भारत में स्थिति थोड़ी अलग है, जहां पैसेंजर EV की रिटेल बिक्री जनवरी 2026 में 18,470 यूनिट पहुंची, जो पिछले साल की समान अवधि से 54.75% अधिक है। लेकिन यह वृद्धि मुख्य रूप से सालाना आधार पर है, जबकि दिसंबर 2025 से तुलना में 23.59% की sequential गिरावट आई है।
कंपनियों को बड़ा झटका लगा है क्योंकि EV की अपेक्षित ग्रोथ नहीं मिल रही। टाटा मोटर्स अभी भी लीडर है, जिसने जनवरी में 8,007 यूनिट बेचीं (43.35% मार्केट शेयर), लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उसकी हिस्सेदारी पहले के 65-70% से घटकर 40% के आसपास रह गई। JSW MG Motor ने 4,703 यूनिट के साथ दूसरा स्थान बरकरार रखा, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 3,668 यूनिट बेचकर 19.86% शेयर हासिल किया, जो पिछले साल से 395% की उछाल है। नई एंट्री VinFast ने भी 431 यूनिट बेचकर चौथा स्थान लिया और Hyundai को पीछे छोड़ दिया।
बड़ी वजहें क्या हैं?
GST कटौती का असर सितंबर 2025 से पेट्रोल-डीजल कारों पर GST में कटौती से ICE वाहनों की कीमतें काफी कम हुईं। इससे EV और ICE के बीच कीमत का अंतर बढ़ गया, जिससे EV की रिलेटिव अफोर्डेबिलिटी घटी। नवंबर 2025 में EV पैसेंजर कार बिक्री 14,700 यूनिट रही, लेकिन पैठ दर 3.7% पर सिमट गई, जो GST कटौती से पहले के 5% से कम है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी देश में अभी सिर्फ करीब 25,000-26,000 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन हैं, जो मांग के मुकाबले काफी कम हैं। कई स्टेशन नॉन-फंक्शनल रहते हैं, मैपिंग गलत होती है और मेंटेनेंस की समस्या बनी रहती है। ग्रामीण और छोटे शहरों में यह सुविधा लगभग न के बराबर है, जिससे रेंज एंग्जायटी बढ़ रही है।
सर्विस और ब्रांड ट्रस्ट की समस्या Ola Electric जैसी कंपनियों में सर्विस चैलेंज से ब्रांड ट्रस्ट प्रभावित हुआ, जिससे बिक्री में गिरावट आई। अन्य EV ब्रांड्स में भी रिपेयर के लिए स्किल्ड मैकेनिक्स की कमी है, जो खरीदारों को हतोत्साहित कर रही है।
हाइब्रिड और ICE की बढ़ती अपील हाइब्रिड वाहन अब ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं क्योंकि वे EV की तरह चार्जिंग की जरूरत नहीं रखते और कीमत में EV से सस्ते पड़ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भी EV डिमांड कूल हो रही है, जहां 2026 में ग्रोथ सिर्फ 13% रहने का अनुमान है।
अन्य फैक्टर सप्लाई चेन इश्यू (मैग्नेट, सेमीकंडक्टर), बढ़ती ब्याज दरें, अफोर्डेबिलिटी की समस्या और प्रीमियम सेगमेंट तक सीमित डिमांड से EV क्रेज कम हुआ है। भारत में EV पैठ अभी भी 3-4% के आसपास है, जबकि 2030 तक 30% का लक्ष्य है।
कंपनियों पर असर
टाटा, MG और महिंद्रा जैसी कंपनियां भारी निवेश कर चुकी हैं, लेकिन मंदी से अरबों का नुकसान हो रहा है।
Ola Electric जैसी कंपनियों में सेल्स 61% तक गिरी, रेवेन्यू 55% कम हुआ।
वैश्विक ब्रांड्स जैसे Tesla भारत में संघर्ष कर रही हैं, जहां सिर्फ कुछ सौ यूनिट बिकीं।
सेगमेंट-वाइज स्थिति (जनवरी 2026)
| ब्रांड | बिक्री (यूनिट) | YoY ग्रोथ (%) | मार्केट शेयर (%) |
|---|---|---|---|
| Tata Motors | 8,007 | 50.71 | 43.35 |
| JSW MG Motor | 4,703 | 3.82 | 25.46 |
| Mahindra | 3,668 | 395.68 | 19.86 |
| VinFast | ~431 | – | – |
| Hyundai | 326 | -2 | – |
भारत में EV ट्रांजिशन जारी है, लेकिन चुनौतियां गहरी हैं। सरकार PM E-DRIVE जैसी स्कीम्स से इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस कर रही है, लेकिन कंज्यूमर सब्सिडी कम होने से मंदी बनी रह सकती है। कंपनियों को अफोर्डेबल मॉडल, बेहतर सर्विस और चार्जिंग नेटवर्क पर जोर देना होगा।