सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद भारतीय निवेशकों में जबरदस्त खरीदारी देखी जा रही है। MCX पर सोना अप्रैल 2026 अनुबंध ₹1,55,000-₹1,55,500 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो पिछले उच्च स्तरों से ₹25,000 से अधिक नीचे है। निवेशक इस गिरावट को शेयर बाजार की तरह डिप-खरीदारी का अवसर मान रहे हैं, जिससे गोल्ड ETF में भारी inflows और फिजिकल गोल्ड की डिमांड बढ़ी है। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और प्रॉफिट बुकिंग मुख्य कारण हैं, लेकिन लंबी अवधि में गोल्ड का आकर्षण बरकरार है।
सोने में गिरावट के बीच खरीदारी की मची लूट, शेयर बाजार की तरह गोल्ड में निवेश कर रहे निवेशक
भारतीय बाजार में सोने की कीमतें पिछले कुछ हफ्तों से दबाव में हैं। MCX पर अप्रैल 2026 एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,55,400 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो पिछले कारोबारी सत्र से ₹400-500 की गिरावट दर्शाता है। दिन के रेंज में निचला स्तर ₹1,54,100 तक छुआ गया, जबकि उच्च स्तर ₹1,55,500 रहा। यह गिरावट जनवरी 2026 के रिकॉर्ड उच्च स्तर ₹1,80,000+ से लगभग 13-15% नीचे है।
रिटेल स्तर पर 24 कैरेट सोना ₹15,600-₹15,800 प्रति ग्राम के बीच उपलब्ध है, जबकि 22 कैरेट ₹14,300-₹14,500 प्रति ग्राम पर। प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, चेन्नई में कीमतें समान ट्रेंड दिखा रही हैं, जहां 10 ग्राम के लिए ₹1,56,000-₹1,58,000 का भाव चल रहा है।
गिरावट के बावजूद निवेशक सक्रिय हैं। टाइटन कंपनी जैसे प्रमुख ज्वैलर्स के एमडी के अनुसार, अब ग्राहक कीमतों में गिरावट को इक्विटी मार्केट की तरह खरीदने का मौका मानते हैं। पहले लोग इंतजार करते थे कि दाम और गिरें, लेकिन अब FOMO (fear of missing out) के कारण हर करेक्शन पर एंट्री ले रहे हैं।
गोल्ड ETF और निवेश डिमांड में उछाल
2025 में गोल्ड ETF में inflows 283% बढ़कर रिकॉर्ड ₹429.6 बिलियन पहुंचे थे। 2026 की शुरुआत में भी ट्रेंड जारी है, जनवरी में ही ₹24,000 करोड़ से अधिक inflows दर्ज हुए, जो इक्विटी फंड्स से अधिक थे। फरवरी में भी डिप पर खरीदारी से ETF होल्डिंग्स बढ़ रही हैं।
इन्वेस्टमेंट डिमांड 2025 में 17% बढ़कर 280 टन पहुंची, जो कुल कंजम्पशन का 40% था। 2026 में कुल डिमांड 600-700 टन रहने का अनुमान है, जहां ज्वैलरी डिमांड घट रही है लेकिन इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है।
गिरावट के मुख्य कारण
वैश्विक स्तर पर प्रॉफिट बुकिंग : पिछले हफ्तों में गोल्ड $5,000+ प्रति औंस के पार गया था, अब निवेशक मुनाफा वसूल रहे हैं।
मजबूत अमेरिकी डॉलर : डॉलर इंडेक्स में तेजी से गोल्ड पर दबाव, क्योंकि डॉलर मजबूत होने पर गोल्ड महंगा पड़ता है।
अमेरिकी आर्थिक डेटा : मजबूत लेबर मार्केट और फेड की रेट कट में देरी की उम्मीद से सेफ-हेवन डिमांड घटी।
मार्जिन हाइक और ट्रेडिंग नियम : कुछ एक्सचेंज पर बदलाव से स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग प्रभावित।
निवेशकों के लिए मौजूदा स्थिति
| पैरामीटर | वर्तमान स्तर (16 फरवरी 2026) | बदलाव (पिछले हाई से) | निवेशक रणनीति |
|---|---|---|---|
| MCX गोल्ड (10 ग्राम) | ₹1,55,400 | -13-15% | डिप खरीदारी, लॉन्ग टर्म होल्ड |
| 24K रिटेल (प्रति ग्राम) | ₹15,644 | -₹1,700+ | ETF/फिजिकल में एंट्री |
| गोल्ड ETF inflows (जनवरी) | ₹24,000 करोड़+ | रिकॉर्ड | डाइवर्सिफिकेशन |
| वैश्विक स्पॉट गोल्ड | $5,000-5,050/औंस | -3-4% हालिया | सेंट्रल बैंक खरीदारी जारी |
निवेशक अब गोल्ड को पोर्टफोलियो का हिस्सा मान रहे हैं, खासकर इक्विटी में उतार-चढ़ाव के बीच। लंबी अवधि में सेंट्रल बैंक की खरीदारी, इन्फ्लेशन हेज और जियोपॉलिटिकल रिस्क गोल्ड को सपोर्ट करते रहेंगे। हालांकि, शॉर्ट टर्म में वोलेटिलिटी बनी रहेगी, इसलिए SIP जैसे तरीके से निवेश फायदेमंद।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट बाजार के रुझानों और उपलब्ध डेटा पर आधारित है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें, बाजार जोखिमों के अधीन है।