“आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए असुरक्षित ऋणों की कुल सीमा 10% से बढ़ाकर 20% करने का प्रस्ताव दिया है। टियर के आधार पर व्यक्तिगत लोन लिमिट 5 लाख से 10 लाख रुपये तक होगी। यह बदलाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो सकता है, जिससे छोटे कारोबारी, सैलरीड व्यक्ति और आम नागरिकों को बिना कोलेटरल के ज्यादा क्रेडिट मिलेगा।”
आरबीआई का बड़ा प्लान, शहरी सहकारी बैंक अब ज्यादा बिना गारंटी लोन दे सकेंगे; क्या है नियम और किसे होगा फायदा?
आरबीआई ने शहरी सहकारी बैंकों (Urban Co-operative Banks – UCBs) के लेंडिंग नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। इसका मुख्य फोकस असुरक्षित (unsecured) यानी बिना गारंटी या कोलेटरल के लोन पर है। वर्तमान में UCBs अपनी कुल एसेट्स का सिर्फ 10% तक असुरक्षित एडवांस दे सकते हैं, लेकिन नए प्रस्ताव में यह सीमा कुल लोन एंड एडवांसेज के 20% तक बढ़ाई जा रही है। यह बदलाव पिछले वित्तीय वर्ष के ऑडिटेड बैलेंस शीट के आधार पर लागू होगा।
इसके अलावा, अतिरिक्त असुरक्षित लोन केवल प्राथमिकता क्षेत्र (priority sector) के लोन के लिए ही दिए जा सकेंगे, और प्रति उधारकर्ता इसकी सीमा 50,000 रुपये तक होगी। असुरक्षित एडवांस की परिभाषा को भी रेशनलाइज किया गया है, जिसमें क्लीन ओवरड्राफ्ट, पर्सनल सिक्योरिटी पर लोन, क्लीन बिल्स आदि शामिल हैं, लेकिन कुछ विशेष श्रेणियां बाहर रखी गई हैं।
टियर-वाइज व्यक्तिगत असुरक्षित लोन की नई सीमाएं
आरबीआई ने UCBs को चार टियर्स में बांटा है, और प्रत्येक के लिए व्यक्तिगत असुरक्षित लोन की ऊपरी सीमा तय की है:
टियर 1 (डिपॉजिट 100 करोड़ रुपये तक): 5 लाख रुपये तक
टियर 2 (डिपॉजिट 100 करोड़ से 1,000 करोड़ तक): 7.5 लाख रुपये तक
टियर 3 (डिपॉजिट 1,000 करोड़ से 10,000 करोड़ तक): 10 लाख रुपये तक
टियर 4 (डिपॉजिट 10,000 करोड़ से अधिक): 10 लाख रुपये तक
यह सीमा कुल असुरक्षित एडवांस की 20% कैप के अंदर लागू होगी। इससे पहले की सीमाएं काफी कम थीं, जिसके कारण कई UCBs असुरक्षित लोन देने में संकोच करते थे।
नॉमिनल मेंबर्स के लिए विशेष प्रावधान
नॉमिनल मेंबर्स (जो बैंक के रेगुलर मेंबर नहीं हैं लेकिन कुछ सेवाओं के लिए जुड़े हैं) को कंज्यूमर ड्यूरेबल्स खरीदने के लिए लोन की सीमा अब 2.5 लाख रुपये प्रति उधारकर्ता तक बढ़ाई जा रही है। यह पहले कम थी। हालांकि, ऐसे लोन बैंक के बायलॉज और निर्दिष्ट कैटेगरी से जुड़े होने चाहिए। नॉमिनल मेंबर्स को लोन देने की शर्तें सख्त की गई हैं ताकि जोखिम नियंत्रित रहे।
UCBs पर क्या असर पड़ेगा?
यह प्रस्ताव UCBs को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देगा। भारत में हजारों शहरी सहकारी बैंक हैं, जो मुख्य रूप से छोटे व्यापारी, सैलरीड क्लास, प्रोफेशनल्स और मिडिल क्लास को सर्विस देते हैं। वर्तमान में इन बैंकों की कुल एसेट्स में असुरक्षित लोन का हिस्सा कम होने से क्रेडिट ग्रोथ सीमित रहती है। नई सीमा से ये बैंक ज्यादा पर्सनल लोन, कंज्यूमर लोन, एजुकेशन लोन और छोटे बिजनेस लोन दे सकेंगे।
किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?
छोटे व्यापारी और MSME : बिना प्रॉपर्टी या FD गारंटी के ज्यादा लोन मिलेगा, जिससे बिजनेस एक्सपैंशन आसान होगा।
सैलरीड व्यक्ति : पर्सनल लोन, होम इम्प्रूवमेंट या वाहन खरीद के लिए आसान क्रेडिट।
मिडिल क्लास परिवार : कंज्यूमर गुड्स, एजुकेशन या मेडिकल इमरजेंसी के लिए बिना ज्यादा कागजी कार्रवाई के फंडिंग।
शहरी क्षेत्रों के निवासी : जहां UCBs की पहुंच ज्यादा है, जैसे मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, पुणे, सूरत आदि में लोकल बैंकिंग मजबूत होगी।
अन्य जुड़े बदलाव
आरबीआई ने असुरक्षित एडवांस पर ग्रैनुलर डिस्क्लोजर अनिवार्य किया है। UCBs को अपनी फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में असुरक्षित लोन और नॉमिनल मेंबर लेंडिंग की विस्तृत जानकारी देनी होगी। इससे ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और रिस्क मैनेजमेंट बेहतर होगा।
कब से लागू होंगे नए नियम?
यह ड्राफ्ट पब्लिक कमेंट्स के लिए जारी किया गया है। फीडबैक 4 मार्च 2026 तक मांगा गया है। संशोधन 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे, या कोई बैंक इसे पहले अपनाए तो पहले भी लागू हो सकता है।
यह कदम RBI की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें UCB सेक्टर को प्रोफेशनलाइज किया जा रहा है, साथ ही ग्रासरूट लेवल पर क्रेडिट पहुंच बढ़ाई जा रही है। इससे आम लोगों को बैंकिंग सेवाएं ज्यादा सुलभ और किफायती मिल सकेंगी।
Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है। निवेश या लोन संबंधी कोई निर्णय लेने से पहले संबंधित बैंक या वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।