“आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर में गिरावट, जलवायु परिवर्तन, उत्पादकता की कमी और पानी की चुनौतियों को प्रमुख मुद्दों के रूप में चिह्नित किया गया है। रिपोर्ट ने अनुसंधान में निवेश, सिंचाई प्रणाली मजबूत करने, फसल विविधीकरण और उर्वरक क्षेत्र में सुधार जैसे चार समाधानों पर जोर दिया है, जो उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय सुरक्षित करने में मदद करेंगे।”
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, कृषि और संबद्ध क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर पिछले पांच वर्षों में 4.4% रही है, लेकिन 2025-26 की दूसरी तिमाही में यह घटकर 3.5% हो गई है। यह गिरावट वैश्विक औसत 2.9% से ऊपर है, लेकिन फिर भी उत्पादकता में कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि अनाज, मक्का, सोयाबीन और दालों की पैदावार वैश्विक औसत से पीछे है, जो किसानों की आय को प्रभावित कर रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित मौसम, बढ़ते तापमान और चरम घटनाएं फसल पैदावार को नुकसान पहुंचा रही हैं।
कृषि क्षेत्र में खंडित भूमि जोत, अपर्याप्त विपणन और भंडारण सुविधाएं, गुणवत्ता वाले इनपुट्स की सीमित पहुंच और निवेश की कमी प्रमुख चुनौतियां हैं। सर्वेक्षण के डेटा से पता चलता है कि उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उत्पादकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। पानी की कमी एक और बड़ा मुद्दा है, जहां सिंचाई सुविधाओं की कमी से कई क्षेत्र सूखे और बाढ़ का शिकार हो रहे हैं। छोटी जोतें और बाजार एकीकरण की कमजोरी किसानों की आय को स्थिर रखने में बाधा डाल रही हैं।
सर्वेक्षण ने कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव पर ध्यान दिया है, जहां बागवानी अब कृषि जीवीए का 33% योगदान दे रही है। 2024-25 में बागवानी उत्पादन 362.08 मिलियन टन पहुंच गया, जो अनाज उत्पादन 357.73 मिलियन टन से अधिक है। लेकिन फसल विविधीकरण की कमी से जोखिम बढ़ रहा है। पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों में 7.1% और 8.8% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो फसल क्षेत्र की 3.5% वृद्धि से बेहतर है।
कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को दूर करने के लिए सर्वेक्षण ने चार प्रमुख समाधान सुझाए हैं। पहला, रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश बढ़ाना, जो नई बीज किस्मों और जलवायु प्रतिरोधी तकनीकों को विकसित करने में मदद करेगा। दूसरा, सिंचाई प्रणाली को मजबूत करना, जिसमें पेर ड्रॉप मोर क्रॉप जैसी योजनाओं के माध्यम से कुशल जल उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है। तीसरा, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना, ताकि किसान उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे फ्लोरिकल्चर और बागवानी की ओर मुड़ें, जो प्रति इकाई क्षेत्र में बेहतर रिटर्न दें। चौथा, उर्वरक क्षेत्र में सुधार, जिसमें वैकल्पिक और जैविक उर्वरकों का उपयोग बढ़ाना और मिट्टी स्वास्थ्य को बनाए रखना है।
इन समाधानों को लागू करने के लिए सर्वेक्षण ने एक्सटेंशन सेवाओं को मजबूत करने, फैर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस (FPOs), प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसाइटीज (PACS) और सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs) को शामिल करने का सुझाव दिया है। सरकारी योजनाएं जैसे कृषोन्नति योजना, जिसमें मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH), नेशनल फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन मिशन (NFSNM) और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन (DAM) शामिल हैं, उत्पादकता बढ़ाने में भूमिका निभा रही हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को उत्पादन लागत का 1.5 गुना तय करने से किसानों को मूल्य स्थिरता मिल रही है।
कृषि उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024-25 में अनाज उत्पादन 3,577.3 लाख मीट्रिक टन पहुंचा, जो पिछले वर्ष से 254.3 लाख मीट्रिक टन अधिक है। यह वृद्धि चावल, गेहूं, मक्का और मोटे अनाजों से हुई है। लेकिन उत्पादकता में वैश्विक अंतर को पाटने के लिए रिसर्च में निवेश जरूरी है। सर्वेक्षण ने निजी क्षेत्र को फूड प्रोसेसिंग में भागीदारी बढ़ाने और डेयरी, मत्स्य पालन जैसे उच्च विकास वाले क्षेत्रों को विस्तार देने का आह्वान किया है।
नीचे एक तालिका दी गई है जो कृषि क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों और उनके प्रभाव को दर्शाती है:
समाधानों के लिए एक और तालिका:
| चुनौती | प्रभाव | डेटा उदाहरण |
|---|---|---|
| जलवायु परिवर्तन | फसल पैदावार में कमी | अनियमित मौसम से 2025-26 में 3.5% वृद्धि दर |
| पानी की कमी | सिंचाई सीमित | कई क्षेत्रों में सूखा प्रभावित, वैश्विक औसत से कम पैदावार |
| उत्पादकता अंतर | आय में कमी | अनाज, दालों की पैदावार वैश्विक औसत से 20-30% कम |
| उर्वरक अत्यधिक उपयोग | मिट्टी स्वास्थ्य बिगड़ना | मिट्टी उत्पादकता में 10-15% गिरावट |
| खंडित जोतें | बाजार एकीकरण कमजोर | औसत जोत आकार 1 हेक्टेयर से कम, आय अस्थिर |
| समाधान | विवरण | अपेक्षित लाभ |
| रिसर्च में निवेश | नई बीज किस्में और तकनीकें विकसित करना | पैदावार 15-20% बढ़ोतरी, जलवायु प्रतिरोध |
| सिंचाई मजबूत करना | पेर ड्रॉप मोर क्रॉप जैसी योजनाएं | जल उपयोग दक्षता 30% सुधार, सूखा जोखिम कम |
| फसल विविधीकरण | बागवानी, फ्लोरिकल्चर को बढ़ावा | आय में 25% वृद्धि, जोखिम विविधीकरण |
| उर्वरक सुधार | जैविक विकल्पों का उपयोग | मिट्टी स्वास्थ्य सुधार, पर्यावरण संरक्षण |
सर्वेक्षण ने कृषि क्षेत्र को 2047 तक विकसित भारत के विजन से जोड़ते हुए कहा है कि स्थिरता और उत्पादकता चुनौतियों को दूर करना जरूरी है। फ्लोरिकल्चर को सनराइज इंडस्ट्री के रूप में पहचाना गया है, जो निर्यात क्षमता और उच्च रिटर्न प्रदान करता है। पीएम-किसान योजना के माध्यम से आय हस्तांतरण और पेंशन कवरेज से किसानों को सहारा मिल रहा है। कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर (AMI) और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) से फार्म-गेट सुविधाएं मजबूत हो रही हैं, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दे रही हैं।
कृषि क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन भी एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन से बाजार लिंकेज और डेटा-संचालित निर्णय लेना आसान हो रहा है। सर्वेक्षण के अनुसार, संबद्ध क्षेत्रों जैसे पशुपालन और मत्स्य पालन में वृद्धि से ग्रामीण रोजगार बढ़ रहे हैं। लेकिन उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक्सटेंशन सेवाओं को मजबूत करना और किसानों को सफल अनुभव साझा करना आवश्यक है। कुल मिलाकर, ये समाधान कृषि को अधिक लचीला और लाभदायक बनाने में मदद करेंगे।
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