‘हमें बचा लो’…भारतीय धागे ने उड़ाई बांग्लादेशी कपड़ा मिल मालिकों की नींद; अपनी सरकार से लगा रहे गुहार

“बांग्लादेशी टेक्सटाइल मिल मालिकों ने सरकार से ड्यूटी-फ्री यार्न आयात पर रोक लगाने की मांग की है, क्योंकि सस्ते भारतीय धागे ने बाजार में बाढ़ ला दी है, जिससे 12,500 करोड़ टका का अनसोल्ड स्टॉक जमा हो गया है और 50 से अधिक मिलें बंद हो चुकी हैं; 1 फरवरी से अनिश्चितकालीन बंद की धमकी दी गई है, जिससे लगभग 10 लाख नौकरियां खतरे में हैं।”

बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) के नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जनवरी के अंत तक कुछ प्रकार के यार्न के लिए ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा वापस नहीं लेती, तो देश भर में स्पिनिंग यूनिट्स 1 फरवरी से अनिश्चितकाल के लिए बंद हो जाएंगी। BTMA के अनुसार, सस्ते भारतीय यार्न के आयात ने घरेलू बाजार को बाढ़ से भर दिया है, जिससे स्थानीय स्पिनर्स के पास लगभग 12,500 करोड़ टका का अनसोल्ड यार्न स्टॉक जमा हो गया है। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में कॉटन यार्न आयात का लगभग 78 प्रतिशत भारत से आया है, जो घरेलू उत्पादकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को खत्म कर रहा है।

BTMA के अध्यक्ष ने कहा कि सस्ते आयात, बढ़ती ऊर्जा लागत और गैस की गंभीर कमी ने उत्पादन क्षमता को आधा कर दिया है और हाल के महीनों में लगभग 2 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। उन्होंने जोर दिया कि 50 से अधिक मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं, जिससे हजारों नौकरियां चली गई हैं, और अगर राष्ट्रव्यापी बंद होता है, तो लगभग 10 लाख श्रमिक प्रभावित होंगे। घरेलू उद्यमी शिकायत कर रहे हैं कि भारतीय सरकार की सब्सिडी के कारण वहां से यार्न बांग्लादेश में अपेक्षाकृत कम कीमत पर आ रहा है, जो स्थानीय मिलों को प्रतिस्पर्धा में पीछे छोड़ रहा है।

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश ने 2025 में लगभग 70 करोड़ किलोग्राम यार्न आयात किया, जिसकी कीमत करीब 2 बिलियन डॉलर थी, और इसमें से 78 प्रतिशत भारत से आया। स्थानीय मिल मालिकों का दावा है कि भारतीय यार्न की कीमत प्रति किलोग्राम लगभग 2.55 डॉलर है, जबकि बांग्लादेशी मिलें 2.80 डॉलर से नीचे बेचकर भी ब्रेक ईवन नहीं कर पा रही हैं। यह अंतर मुख्य रूप से भारतीय सब्सिडी और बांग्लादेश में बढ़ती इनपुट लागत से आ रहा है।

बांग्लादेश के टेक्सटाइल उद्योग में पिछले दो-तीन वर्षों में आयातित यार्न पर निर्भरता बढ़ी है, खासकर गारमेंट एक्सपोर्टर्स ने सस्ते विकल्पों की ओर रुख किया है। FY2022-23 के बाद दो वर्षों में यार्न आयात दोगुना हो गया, जिसमें भारत प्रमुख सप्लायर बना। BTMA का कहना है कि अगर घरेलू मिलें बंद होती हैं, तो गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स को अंततः विदेश से यार्न आयात करना पड़ेगा, विशेष रूप से भारत से, लेकिन ऊंची कीमतों पर। इससे एक्सपोर्ट बाधित हो सकता है और विदेशी खरीदारों को फायदा पहुंचेगा।

इस संकट ने बांग्लादेश के टेक्सटाइल सप्लाई चेन की कमजोरियों को उजागर किया है। मिल मालिकों ने सरकार से अपील की है कि ड्यूटी-फ्री आयात पर रोक लगाकर स्थानीय उत्पादन को संरक्षण दिया जाए, अन्यथा उद्योग दिवालिया हो जाएगा। उन्होंने कहा कि गैस संकट ने उत्पादन को 50 प्रतिशत तक घटा दिया है, जिससे लागत और बढ़ गई है। BTMA ने सुझाव दिया कि यार्न आयात पर कर बढ़ाकर लगभग 37 प्रतिशत किया जाए, ताकि घरेलू मिलों को राहत मिले।

इस मुद्दे पर गारमेंट एक्सपोर्टर्स और टेक्सटाइल मिल ओनर्स के बीच विवाद बढ़ गया है। बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BKMEA) का कहना है कि हाल ही में एक्सपोर्ट घटने से यार्न आयात भी कम हुआ है, लेकिन मिल मालिकों का आरोप है कि सस्ते आयात ने क्षमता को निष्क्रिय कर दिया है। दोनों पक्षों के बीच मध्य मार्ग खोजने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन अगर बंद होता है, तो RMG सेक्टर पर असर पड़ेगा, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा है।

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इस स्थिति से भारतीय टेक्सटाइल कंपनियां लाभ उठा सकती हैं। अगर बांग्लादेश ड्यूटी-फ्री आयात बंद करता है या उसकी स्पिनिंग मिलें बंद होती हैं, तो गारमेंट इंडस्ट्री को अभी भी यार्न की जरूरत पड़ेगी, जिससे भारतीय यार्न की मांग बढ़ सकती है, खासकर कॉटन और ब्लेंडेड यार्न की। इससे भारतीय स्पिनिंग मिलों और एकीकृत टेक्सटाइल फर्मों को अधिक ऑर्डर मिल सकते हैं और बेहतर बिक्री कीमतें। अल्पावधि में भारतीय कंपनियां उत्पादन बढ़ा सकती हैं और ऊंचे दामों पर बेच सकती हैं।

नीचे दी गई तालिका में यार्न कीमतों और आयात के प्रमुख आंकड़ों की तुलना की गई है:

इसके अलावा, प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

पैरामीटरभारतीय यार्नबांग्लादेशी यार्नटिप्पणी
प्रति किलोग्राम कीमत (USD)2.552.80भारतीय सब्सिडी के कारण कम कीमत
2025 आयात मात्रा (किलोग्राम)70 करोड़ (कुल का 78%)मुख्य रूप से भारत से
अनसोल्ड स्टॉक मूल्य (टका)12,500 करोड़घरेलू मिलों का नुकसान
बंद मिलों की संख्या50+गैस संकट और सस्ते आयात से
प्रभावित नौकरियां10 लाखराष्ट्रव्यापी बंद की स्थिति में

सब्सिडी का प्रभाव : भारतीय सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं यार्न एक्सपोर्टर्स को प्रति किलोग्राम लगभग 0.30 डॉलर कम कीमत पर बेचने की अनुमति देती हैं।

ऊर्जा संकट : बांग्लादेश में गैस की कमी से उत्पादन 50 प्रतिशत कम हुआ, जिससे लागत बढ़ी।

एक्सपोर्ट जोखिम : अगर मिलें बंद होती हैं, तो RMG एक्सपोर्ट बाधित हो सकता है, जो बांग्लादेश की GDP का बड़ा हिस्सा है।

मध्य मार्ग की संभावना : दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन मिल मालिकों की धमकी से तनाव बढ़ा।

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भारतीय लाभ : भारतीय स्टॉक जैसे स्पिनिंग और टेक्सटाइल कंपनियां मांग वृद्धि से फायदेमंद हो सकती हैं।

आयात निर्भरता : बांग्लादेश का टेक्सटाइल उद्योग अब आयात पर अधिक निर्भर, जो पहले घरेलू था।

सरकारी कार्रवाई : सरकार को ड्यूटी बढ़ाने या सब्सिडी देने पर विचार करना पड़ सकता है।

इस विवाद ने क्षेत्रीय व्यापार गतिशीलता को प्रभावित किया है, जहां भारत बांग्लादेश का प्रमुख यार्न सप्लायर बना हुआ है। मिल मालिकों की गुहार से पता चलता है कि स्थानीय उद्योग संरक्षण की मांग कर रहा है, लेकिन गारमेंट एक्सपोर्टर्स लागत कम रखना चाहते हैं। अगर समाधान नहीं निकला, तो आर्थिक प्रभाव गहरा सकता है।

Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न स्रोतों पर आधारित है और सूचना उद्देश्यों के लिए है।

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